फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के नज़र में प्रेमचंद

  शिवकुमार मिश्र द्वारा सम्पादित अंग्रेजी पुस्तक ‘आवर कंटम्परोरी प्रेमचन्द’ के लिए यह टिप्पणी फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने विशेष तौर पर भेजी थी।   इसका स्थायी महत्त्व है, चूँकि प्रेमचन्द के बाद की पीढ़ी के एक मूर्धन्य लेखक की अग्रगामी चेतना इस वक्तव्य में सुस्पष्ट रूप में ध्वनित होती है।  राष्ट्रीय संस्कृति में ऐसा कौन-सा … Continue reading फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के नज़र में प्रेमचंद