ऐसे दौर में एक और संगठन खड़ा हुआ। नाम था EPRLF ‘ईलम पीपुल्स रिवोल्यूशनरी लिबरेशन फ्रंट’। इसके संस्थापक थे अन्नामालाई वरदराज पेरूमल। पेरूमल ने जाफना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी और वे वहां व्याख्याता भी रहे थे। इनके पिता अन्नामलाई भारतीय तमिल थे लेकिन पेरुमल का जन्म श्रीलंका में ही हुआ था ।
भारतीय शांति सेना की वापसी के बाद पेरूमल और श्रीलंका की तत्कालीन केंद्रीय सत्ता के बीच तनातनी बढ़ गई। पेरूमल अपने प्रांत में श्रीलंका की सेना की मौजूदगी का विरोध करने लगे। यहाँ तक धमकी दे दी कि अगर उनकी बातें नहीं मानी गईं तो वे ईलम की स्वतंत्रता की घोषणा कर देंगे। उन्होंने 19 बिंदुओं का एक माँगपत्र दिया और प्रांत को स्वायत्त न करने पर स्वतंत्रता की घोषणा की धमकी दी।अंततः श्रीलंका की सरकार ने पेरूमल की प्रांतीय सरकार को भंग कर दिया। सत्ता अपने हाथ में ले ली तथा सरकार और उसकी सेना पेरूमल के पीछे पड़ गई।
यहाँ भारत सरकार ने उन्हें बेहद गोपनीय तरीके से एमपी के अशोकनगर जिले में चंदेरी रखा। चंदेरी की किला कोठी में जबरदस्त सुरक्षा के बीच पेरूमल वर्षों तक सपरिवार रहे। सुरक्षा ऐसी थी कि चंदेरी , अशोकनगर के लोग लंबे समय तक यह नहीं जान पाए कि संगीनों के साये में आखिर यहां कौन रहता है।श्रीलंका के हालात सुधरने पर पेरूमल कुछ साल पहले वापस अपने देश लौट गए। आजकल वे वहाँ सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं।

वरिष्ठ लेखक और पत्रकार। क्रेडिबल हिस्ट्री के सलाहकार संपादक