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Credible History is an endeavour to preserve authentic history as gleaned through the lens of established, respected historians who have spent their lives researching it via reliable sources. It aims to counter the propaganda being spread through a large section of mainstream media and social media platforms, and provide easy access to established historical resources

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Sunday April 14, 2024
राजकुमारी अमृत कौर

 स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रीयकरण क्यों जरूरी है – राजकुमरी अमृत कौर

        राजकुमारी अमृत कौर (1889-1964) भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री और महिलाओं के हित की निरंतर समर्थक थीं।

Usha Mehta and Sara Ali Khan

उषा मेहता:जिन्होंने रेडियो को आज़ादी का हथियार बनाया

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के संघर्ष को रेडियो के नई तकनीक से जोड़ने वाली  उषा मेहता अचानक इतिहास के पन्नों से

सुभाषचंद्र बोस और महात्मा गांधी

जब गांधी और सुभाष ने सुलझाई मज़दूरों की समस्या

  टाटा स्टील और जमशेदपुर शहर भारत के कई नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की यात्राओं का एक नियमित पड़ाव रहा

रियासती एकता में पंडित नेहरू का योगदान

[शेख़ मोहम्मद अब्दुल्ला (1905-1981) जिन्हें शेर-ए-काश्मीर भी कहा जाता है, कश्मीर के सबसे महत्त्वपूर्ण नेताओं में थे। आज़ादी के बाद

मई दिवस का गौरवशाली इतिहास: चुनौतियाँ आज भी बरक़रार

सत्यम सत्येन्द्र पाण्डेय आठ घंटे काम,आठ घंटे मनोरंजन और आठ घंटे आराम औद्योगिक पूंजीवादी क्रांति ने सामंतवादी उत्पादन संबंधों को

नई किताब: ब्रिटिश अदालत में मौलाना आज़ाद का बयान

कौल-ए-फ़ैसल (इंसाफ़ की बात) मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का वह बयान है जो राजद्रोह के मुक़दमे के दौरान उन्होंने प्रेसीडेंसी

आज़ाद हिन्द फ़ौज के जनरल शाहनवाज़ खान : जिन्हें भूल गया वतन

चालीस करोड़ों की आवाज़  सहगल-ढिल्लन-शाहनवाज़   दिल्ली के लाल क़िले में जब आज़ाद हिन्द फ़ौज़ के जाँबाज सिपाहियों पर अंग्रेज़ी

अंडमान के भूले हुए वीर : #जिन्होंनेमाफ़ीनहींमांगी

[1857 के बाद जब विद्रोहियों से हिन्दुस्तानी जेलें भर गईं तो पहली बार क्रांतिकारियों को अंडमान भेजा गया। तब सेल्यूलर

#FactCheck स्वामी श्रद्धानंद की हत्या पर क्या महात्मा गांधी ने हत्यारे राशिद अली का साथ दिया था?

स्वामी श्रद्धानन्द  की हत्या 23 दिसम्बर 1926 को दिल्ली में हुई थी।  उसके बाद गाँधी जी का स्वामी श्रद्धानन्द जी

क्यों छोड़नी पड़ी हॉकी के पहले कप्तान जयपाल मुंडा को कप्तानी और फिर आई सी एस की नौकरी भी ? : विशी सिन्हा

विशी सिन्हा बता रहे हैं कि ओलिम्पिक में भारतीय हॉकी के पहले कप्तान जयपाल मुंडा ने क्यों छोड़ दी कप्तानी