Deprecated: Creation of dynamic property RZP_Setting::$title is deprecated in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php on line 13

Deprecated: Creation of dynamic property RZP_Setting::$description is deprecated in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php on line 15

Deprecated: Creation of dynamic property RZP_Setting::$keyID is deprecated in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php on line 17

Deprecated: Creation of dynamic property RZP_Setting::$keySecret is deprecated in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php on line 19

Deprecated: Creation of dynamic property RZP_Setting::$paymentAction is deprecated in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php on line 21

Deprecated: Creation of dynamic property RZP_Setting::$template is deprecated in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php on line 23

Deprecated: Creation of dynamic property RZP_Payment_Button_Loader::$settings is deprecated in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/razorpay-payment-buttons.php on line 73

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php:13) in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/ip2location-country-blocker/ip2location-country-blocker.php on line 2040

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php:13) in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/ip2location-country-blocker/ip2location-country-blocker.php on line 2041

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php:13) in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/ip2location-country-blocker/ip2location-country-blocker.php on line 2042

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/razorpay-payment-button/includes/rzp-btn-settings.php:13) in /home/theckwwv/public_html/wp-content/plugins/ip2location-country-blocker/ip2location-country-blocker.php on line 2043
पूर्व और पश्चिम के विचारों का संगम थे पंडित नेहरू — फ्रैंक मोरैस – The Credible History
FeaturedForgotten HeroFreedom MovementGandhiJawaharlal NehruLeadersOthersPeople's History

पूर्व और पश्चिम के विचारों का संगम थे पंडित नेहरू — फ्रैंक मोरैस

पंडित नेहरू के जीवन का सर्वोत्तम काल वह था, जब वे  भारत की स्वाधीनता के संघर्ष  में संलग्न थे। स्वतंत्रता-पूर्व के वे सुनहरे वर्ष उनके संघर्ष और त्याग से परिपूर्ण थे। यद्यपि 1916 में लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में उनकी  गांधीजी से पहली भेंट हुई, लेकिन तत्काल वे गांधीजी की राजनीति से सक्रिय रूप से नहीं जुड़े। तीन वर्ष बाद, दिसंबर 1921 में, पंडित नेहरू पहली बार जेल गए।

गांधीजी के साथ सामंजस्य

पंडित नेहरू महात्मा गांधी की ओर क्यों आकर्षित हुए? इसका मुख्य कारण गांधीजी का विद्रोही स्वरूप था। गांधीजी अन्याय और क्रूरता के विरुद्ध थे और ऊँचे सिद्धांतों में विश्वास करने के बजाय, उन्हें जीवन में अपनाने पर जोर देते थे। पंडित नेहरू और गांधीजी दोनों स्वतंत्रता को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं मानते थे; वे इसे जनता की सामाजिक और आर्थिक उन्नति के साथ जोड़कर देखते थे। पंडित नेहरू  के अनुसार, राजनीतिक दासता से मुक्ति के साथ-साथ मानसिक दासता से मुक्ति भी आवश्यक थी।

स्वतंत्रता की इस विचारधारा ने पंडित नेहरू  को उस समय गहराई से प्रभावित किया जब 1920 की गर्मियों में उन्होंने पहली बार भारत के गरीब और भूखे किसान को करीब से देखा। इलाहाबाद में जब कुछ किसान पहुंचे, तो पंडित नेहरू  ने उनके शिविर का दौरा किया। वहाँ की परिस्थितियाँ देखकर वे भीतर तक हिल गए। इसके बाद, पंडित नेहरू  ने भारत को दलित और गरीब किसानों के रूप में देखना शुरू किया।  गांधीजी के साथ इस दृष्टिकोण पर चर्चा के दौरान उनके बीच मतभेद भी उभरे।   गांधीजी ने धार्मिक और आध्यात्मिक उद्देश्यों पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया, जबकि पंडित नेहरू को उनके कुछ विचार मध्ययुगीन और अव्यावहारिक लगे।

पंडित नेहरू और गांधीजी के विचारों में वर्षों तक अद्भुत साम्य रहा। हालाँकि समय-समय पर पंडित नेहरू  ने अपने कार्य को गांधीजी  की नीतियों के अनुरूप ढाला, लेकिन उन्होंने अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। 1927 से 1947 तक  पंडित नेहरू  ने उन्हीं विचारों का प्रचार-प्रसार किया जिन्हें वे कार्यरूप में लाना चाहते थे। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका मानना था कि केवल राष्ट्रवाद पर्याप्त नहीं है; भारत को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की व्यापक परिप्रेक्ष्य में अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए।

पंडित नेहरू  की खासियत यह थी कि उन्होंने  गांधीजी के विचारों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़कर मध्यवर्गीय बौद्धिक वर्ग को गांधीजी के ध्वज तले संगठित किया। हालाँकि, वे मशीनों और आधुनिक सभ्यता पर गांधीजी के विचारों से सहमत नहीं थे। वे सविनय अवज्ञा आंदोलन के धार्मिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर  गांधीजी के जोर से भी प्रसन्न नहीं थे। गरीबी और कष्टपूर्ण जीवन के  महात्मा गांधी के आदर्शीकरण पर भी उन्हें आपत्ति थी।

 

जवाहर लाल नेहरू और फ्रैंक मोरेस१
जवाहर लाल नेहरू और फ्रैंक मोरेस

पंडित नेहरू के यूरोप यात्राओं का अंतर्राष्ट्रीय महत्व

1920 के दशक के अंत तक पंडित नेहरू  का समाजवाद अधिक ठोस रूप ले चुका था। मार्च 1926 में वे अपनी पत्नी कमला और नौ वर्षीय पुत्री इंदिरा के साथ यूरोप गए, जहाँ उन्होंने 21 महीने बिताए।

इस यात्रा ने उनके जीवन में एक निर्णायक मोड़ लाया और  भारतीय राष्ट्रवाद  में अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण जोड़ा। उनका मानना था कि भारत को अलग-थलग नहीं देखा जा सकता; वह विश्व समाज का एक अभिन्न अंग है। स्वतंत्रता के बाद, यही दृष्टिकोण उनकी विदेश नीति का आधार बना।

यूरोप यात्रा ने पंडित नेहरू की इस सोच को मजबूत किया कि भारत का स्वतंत्रता संघर्ष अंतरराष्ट्रीय महत्व रखता है। बाद में, भारत की स्वतंत्रता ने एशिया और विश्व में स्वतंत्रता का प्रतीक बना दिया। पंडित नेहरू  का विश्वास था कि भारत की प्रगति को विश्व प्रगति से जोड़ा जाना चाहिए। उनकी विदेश नीति में उपनिवेशवाद का विरोध और गुटनिरपेक्षता की भावना इसी सोच का परिणाम थी।

पंडित नेहरू  की विचारधारा के परिपक्व होने में 1926 और 1938 की यूरोप यात्राओं का विशेष महत्व रहा। पहली यात्रा के दौरान वे सिद्धांतवादी  समाजवादी  थे, जो स्वतंत्रता को तभी सार्थक मानते थे जब सामाजिक और आर्थिक उन्नति हो। हालांकि, उस समय उनके पास भारत के आर्थिक पुनरुत्थान के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं थी। 1930 के दशक में जेल में बिताए गए समय ने उन्हें  समाजवादी  और मार्क्सवादी साहित्य  का अध्ययन करने का अवसर दिया, जिससे स्वतंत्र भारत की आवश्यकताओं के बारे में उनके विचार विकसित हुए।

1938 में यूरोप यात्रा के दौरान उनके विचार पहले से अधिक स्पष्ट और परिपक्व हो चुके थे। इस समय उनके अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण में  उपनिवेशवाद का विरोध तो था, परंतु गुटनिरपेक्षता का पुट इसमें नहीं था।


यह वेबसाईट आपके ही सहयोग से चलती है। इतिहास बदलने के खिलाफ़ संघर्ष में

वेबसाइट को SUBSCRIBE करके

भागीदार बनें।


उद्योगों का राष्ट्रीयकरण के शिल्पकार

1931 में कराची में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान पंडित नेहरू  ने एक नीतिगत प्रस्ताव रखा, जिसमें प्रमुख उद्योगों और सेवाओं के राष्ट्रीयकरण की वकालत की गई थी।

इसके पहले 1929 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने एक ठोस  समाजवादी  कार्यक्रम अपनाने की सिफारिश की थी। पंडित नेहरू  ने एक ऐसे समाजवादी भारत का सपना देखा जो सामंती तत्वों और राजशाही के अत्याचारों से मुक्त हो। इस दृष्टिकोण की औपचारिक रूपरेखा 20 साल बाद कांग्रेस के  अधिवेशन में प्रस्तुत की गई।

पंडित नेहरू सिद्धांत एक ऐसी नीति और विचारधारा थी जो उपनिवेशवाद से मुक्त हुए नए देशों के लिए बनाई गई थी। भारत ने एक ऐसा मंच प्रदान किया जिससे पश्चिम अपनी साम्राज्यवादी दृष्टि का समायोजन कर सकता था। पंडित नेहरू  सिद्धांत ने प्रभुसत्तात्मक समता की संकल्पना को कानूनी दर्जा प्रदान किया, जिसे नवस्वाधीन देशों पर लागू किया गया। इसके मुख्य घटक गुटनिरपेक्षता और पंचशील के पांच सिद्धांत थे। पंडित नेहरू  ने भारतीय जनमानस में एक नई मानसिकता को जन्म दिया और देश के मानसिक एवं सामाजिक वातावरण को बदला। उन्होंने लोगों को लोकतंत्र का आदर करना सिखाया और उनका दुरुपयोग नहीं किया।


उत्तरदायित्व के भार के कारण जवाहरलाल को बड़ी तेजी के साथ बूढ़े होते देखा है- सरदार पटेल


नेहरू की लोकप्रियता का रहस्य

यदि पंडित नेहरू  न होते, तो भारत का रूप कुछ और होता। पंडित नेहरू  ने भारत को एक नया दृष्टिकोण और उद्देश्य दिया और जनता को अपने सपनों का भारत बनाने के लिए प्रेरित किया। अन्य महापुरुषों की तरह  पंडित नेहरू  में भी मानवीय कमियाँ थीं, लेकिन उनके पास सुधार की शक्ति थी, और उनकी गलतियों को आवश्यकता से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया।

पंडित नेहरू  के नेतृत्व में भारत ने स्वतंत्रता का एक नया रूप देखा, जिसने लगभग एक हजार वर्षों बाद आधुनिक दुनिया में स्वाधीनता का अनुभव किया। उनकी लोकप्रियता का राज उनका स्वच्छ हृदय और निःस्वार्थ दृष्टिकोण था।

पंडित नेहरू एक अद्वितीय व्यक्तित्व थे, जिन्होंने पूर्व और पश्चिम के विचारों का संगम प्रस्तुत किया। विश्व उनके योगदान को चिरकाल तक स्मरण करेगा, क्योंकि उन्होंने भारत के हितों को सदैव प्राथमिकता दी और अपने असफलताओं के बावजूद देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।

Editor, The Credible History

जनता का इतिहास, जनता की भाषा में

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button